Panchtantra Ki Kahani – इशारे अपने-अपने

Panchtantra Ki Kahani
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मकरंदपुर के राजा मोहित जैन विद्वान लोगों का बड़ा आदर करते थे | उनके दरबार में एक से बढ़कर एक विद्वान थे जिनकी चर्चा दूर-दूर तक थी| अगर किसी दूसरे राज्य से कोई विद्वान आता तो मैं उसका आदर करते और उसे पुरस्कृत भी करते|

एक दिन उनके दरबार में एक पंडित आया | महाराज ने उसका स्वागत किया और उसको आसन पर विराजमान होने को कहा|  लेकिन पंडित ने कहा “महाराज मैं यहां अपना स्वागत कराने नहीं आया हूँ | मैं आपके विद्वान दरबारियों से संकेतों में कुछ कहूंगा जिसका जवाब उन्हें संकेतो में ही देना पड़ेगा|  अगर उन्होंने मेरी बातों का सही जवाब दे दिया तो मैं आजीवन आप के दरबार में मुफ्त सेवा करूंगा अन्यथा आप को मुझे आधा राज्य देना होगा | मैं आपकी विधानसभा को चुनौती देने आया हूं “| मोहित जैन को अपने विद्वानों पर पूरा भरोसा था | उन्होंने पंडित की चुनौती स्वीकार कर ली |

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पंडित ने विधानसभा के समक्ष 2-3 के हावभाव बनाई मगर विधान सभा के किसी भी व्यक्ति को कुछ भी समझ में नहीं आया | वह चुपचाप बैठे रहे पंडित ने हँसते करते हुए कहा महाराज आप के विद्वानों के तो  पैरों तले जमीन खिसक गई है |  जिन के बल पर आपने अपना आधा राज्य दाव पर लगा दिया उनकी हालत को देखिए |  अब आप अपने वादे के मुताबिक मुझे अपना आधा राज्य दे दें |

मोहित  सेन सकपका गएँ  | इतनी  आसानी से अपने हाथ से आधा राज्य कैसे जाने देते  उन्होंने कहा ” अभी नहीं पंडित जी | हमारी विधानसभा का एक सदस्य अनुपस्थित है |  उसकी बहन का विवाह है इसलिए वह  गांव गया हुआ है | 15 दिनों का समय दें | तब तक वह वापस लौट आएगा अगर वह भी आपके इशारों का जवाब ना दे सका तो आधा राज्य आपका |  पंडित 15 दिनों के बाद आने की बात कहकर वापस चला गया |

उसके जाते ही दरबारियों ने पूछा महाराज आप किस सदस्य के गांव जाने की बात कर रहे थे | मोहित सेन ने गुस्से से कहा “वह तो मुझे उस पंडित को कुछ दिनों टालने के लिए कहना पड़ा |  आप लोगों की वजह से आज मेरा आधा राज्य ही चला जाता | आप राज्य में मुनादी करवा दे जो पंडित के संकेतों का सही उत्तर देगा उसे ₹1000 स्वर्ण मुद्राएं इनाम में दी जाएगी|”

उस पंडित का ऐसा दव दवा फैला हुआ था की मुनादी सुनकर सिर्फ एक आदमी सामने आया | सब घबरा  रहे थे कि वो  सही जवाब ना दे पाए तो क्या होगा |  जो व्यक्ति सामने आया वह एक चरवाहा था जो अपने गांव के लोगों के पशु  चराता था |

दरबारियों ने कहा महाराज एक चरवाहा विद्वान पंडित के संकेतों का क्या जवाब देगा |  मोहित सेन ने कहा आप लोग हार चुके हैं | पूरे राज्य में एक अकेला यही व्यक्ति सामने आया है | वैसे भी कल पंडित का जवाब नहीं दिया तो आधा राज्य चला जाएगा फिर इस पर दांव खेलने में क्या दिक्कत है |  मोहित जी ने  चरवाहा  को अगले दिन दरबार में अच्छे कपड़े पहन कर आने का  आदेश दिया |  पंडित दरबार में आ पहुंचा | मोहित सेन ने चरवाहा से उनका परिचय करवाते हुए कहा यही हमारा विधानसभा का वह सदस्य है |

पंडित ने  चरवाहा को एक उंगली दिखाई चरवाहा ने उसको दो उंगलियां दिखा दी | पंडित ने अपने दोनों हाथ ऊँचे किये और फिर झटके से  नीचे किए मनो कुछ फेका हो  | चरवाहा ने दो बार जमीन पर कूद  लगाई और दरवाजे की तरफ भागा फिर लौट आया | पंडित ने महाराज को झुक कर सलाम किया और बोला “ महाराज में इनके आगे छोटा पड़ गया | आप चाहे तो मैं उम्र भर आपकी सेवा मुफ्त में करूंगा “| महाराज मोहित जैन को बड़ा सुकून मिला | पिन्ड छुड़ाने के लिए बोले “अरे नहीं नहीं आप अपने राज्य लौट जाएं बस यह बताएं कि इन विचारों का क्या मतलब था” |  पंडित ने बताया कि पहली बार उसने एक उंगली दिखाई दी इसका मतलब था कि सबका मालिक एक है |  लेकिन आपके विद्वान ने कहा नहीं मेरे दो मालिक है ऊपरवाला और दूसरे हमारे राजा | दूसरी बार मैंने उससे पूछा ऐसा क्यों होता है कि  हम धरती के नीचे क्यों नहीं गिरते तब  आपके विद्वान ने इशारों से समझाया कि ऐसा गुरुतवा कर्षण के कारण होता है, हम कहीं भी जाएं वापस धरती पर ही आ जाते हैं|

ऐसा कहकर पंडित चला गया लेकिन चरवाहा हंसने लगा| उसने कहा “महाराज मैं सच बताऊं मैंने सोचा वह मेरी एक आंख फ़ोड़ने की धमकी दे रहा है तो मैंने कहा मैं तुम्हारी दोनों आंखें फोड़ दूंगा | उसने हाथ ऊपर नीचे किए तो मैं समझा कि वह मुझे उठा कर फेकने की धमकी दे रहा है मैंने समझाया कि मैं इस तरह कूदकर   भाग जाऊंगा |” उसकी बात सुनकर सभी ठहाके मारकर हसने लगे  महाराजभी मुस्कुराए बिना नहीं रह सके| उन्होंने उसे  बहुत सा इनाम देकर विदा किया|

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