Best Motivational Story In Hindi – एक लोटा पानी

बहुत समय पहले की बात  है एक गांव में राधा नाम की एक औरत रहती थी | राधा बहुत ही समझदार थी |  उसके पास एक भेड़ थी |   भेड़  जो दूध देती राधा उसमें से कुछ दूध बचा लेती |  दूध से दही जमा लेती और  दही से मक्खन निकाल लेती |   छाछ  तो वह पी लेती लेकिन मक्खन से घी   निकाल लेती और उसे एक मटकी में डाल देती |   धीरे-धीरे मटकी घी  से भर गई |  राधा ने सोचा अगर  नगर में जाकर घी  बेचा जाए तो काफी पैसे मिल जाएंगे |  इन पैसों से वह घर की जरूरत का कुछ सामान खरीद सकती है|

Motivational Story In Hindi

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Motivational Story In Hindi

इसीलिए वह घी की मटकी सिर पर उठाकर नगर की ओर चल पड़ी |  उन दिनों आवाजाही के अधिक साधन नहीं थे |   लोग अधिकतर पैदल ही सफर करते थे |  रास्ता बहुत लंबा था  | गर्मी भी बहुत थी इसीलिए राधा जल्दी ही थक गई |   उसने सोचा थोड़ा आराम कर लूं |   आराम करने के लिए वह बृछ   के नीचे बैठ गई |  घी कि  मटकी उसने एक तरफ रख दी |  बृछ  की शीतल छाया में बैठते ही राधा को नींद आ गई |  जब उसकी आंख खुली तो उसने देखा कि की मटकी वहां नहीं थी |

 

उसने घबरा कर इधर उधर देखा उसे थोड़ी दूर पर ही एक औरत अपने सिर पर मटकी लिए जाती दिखाई दी |  राधा औरत के पीछे भागी |  औरत के पास पहुंच कर राधा ने  अपनी मटकी  पहचान ली |  राधा ने उस औरत से अपनी घी  की मटकी मांगी|  वह औरत बोली “यह मटकी तो मेरी है|  तुम्हें क्यों दूं?” राधा ने बहुत विनती की लेकिन उस औरत पर कुछ असर ना हुआ |

 

उसने राधा की एक ना सुनी | राधा उसके साथ साथ चलती नगर पहुंच गई | नगर में पहुंचकर राधा ने मटकी के लिए बहुत शोर मचाया | शोर सुनकर लोग एकत्र हो गए | लोगों ने जब पूछा तो उस औरत ने मटकी को अपना बताया | लोग निर्णय नहीं पढ़ पाए कि वास्तव में मटकी  किसकी है |

 

इसीलिए वह उन दोनों को पंचायत के पास ले गए | राधा ने सरपंच से कहा ” हुजूर इस औरत ने मेरी घी  की मटकी चुरा ली|  है कृपया मुझे मेरी मटकी दिला दे | मुझे यह घी बेचकर घर  के लिए जरूरी सामान खरीदना है | ”

 

“तुम्हारे पास यह घी  कहां से आया और इसने  कैसे चुरा लिया?” सरपंच ने पूछा |

 

“मेरे पास एक भीड़ है | उसी के दूध से मैंने यही जमा किया है|  रास्ते में आराम करने के लिए मैं एक वृक्ष की छाया में बैठी तो मुझे नींद आ गई | तभी यह औरत मेरी मटकी उठा कर चलती बनी | सरपंच ने उससे पूछा तो वह बोली “हुजूर आप ठीक ठीक न्याय  करें |  मैंने पिछले महीने में एक गाय खरीदी है जो बहुत दूध देती है  |  मैंने यह घी  अपनी गाय के दूध से ही तैयार किया है  | जरा सोचिए एक भेड़  रखने वाली औरत एक मटकी घी  कैसे जमा कर सकती है? ”

 

सरपंच भी दोनों की बात सुनकर दुविधा में पड़ गया  | वह भी निर्णय नहीं कर पा रहा था कि वास्तव में घी   की मटकी किसकी है  | उसने दोनों औरतों से पूछा “क्या तुम्हारे पास कोई सबूत है?” तो उन्होंने कहा कि उनके पास कोई सबूत नहीं है  |

 

सरपंच को एक उपाय सूझा  | उसने दोनों औरतों से कहा “वर्षा के पानी से कचहरी के सामने जो कीचड़ जमा हो गया है उसमें मेरे बेटे का एक जूता रह गया है  |

तुम पहले वह जूता निकाल कर लाओ  फिर मैं फैसला करूंगा | राधा और औरत कीचड़ में घुसकर जूता ढूंढने लगे | वह बहुत देर तक कीचड़ में हाथ पांव मरते रहे परंतु उन्हें जूता  नहीं मिला | तब सरपंच ने उन्हें वापस आ जाने को कहा | ]

 

दोनों कीचड़ में लथपथ हो गई थी | सरपंच ने उन्हें एक एक लोटा पानी दिया | राधा ने तो उस एक लोटा पानी में से ही अपने हाथ पैर धोकर थोड़ा सा पानी बचा लिया परंतु गाय वाली वह औरत एक लोटा पानी से हाथ भी साफ नहीं कर पाई | उसने कहा “इतने पानी से क्या होगा ? मुझे एक बाल्टी पानी दो ताकि मैं ठीक से हाथ पांव धो  सकूं|”  सरपंच के आदेश से उसे और पानी दे दिया गया |

 

हाथ पांव धोने  के बाद जब राधा उस औरत के साथ पंचायत में पहुंची तो सरपंच ने फैसला सुना दिया यह मटकी भेड़  वाली औरत की है | गाय वाली औरत जबरन उस पर अपना अधिकार जमा नहीं है | सब लोग सरपंच के न्याय  से बहुत खुश हुए क्योंकि उन्होंने स्वयं देख लिया था कि राधा  ने संयम से सिर्फ एक लोटा पानी से ही हाथ पांव धो लिए थे जबकि गाय वाली औरतों में संयम नाम मात्र को भी ना था | वह भला कि कैसे जमा कर सकती थी?

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