Hindi Story For Kids – अपना अपना  मोल

Hindi Story For Kids
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किसी गांव में एक आम का विशालकाय पेड़ था |  उस पेड़ में बड़े ही रसीले आम लगते थे  |  लेकिन बच्चे थे कि आम की को पकने से पहले ही तोड़ कर खा जाते थे |  बेचारा पेड़ मन मसोसकर रह जाता था  | बच्चे आए दिन पेड़ की शाखा पर चढ़ते और कच्ची अमिया खाने के चक्कर में कई कमजोर डाले तोड़  डालते  |

आम का पेड़ सोचता कि वो पेड़ अच्छे हैं जिन पर कोई फल नहीं लगते |  कम से कम वह चैन से तो रहते हैं  | 1 दिन की बात है आम का पेड़ उदास था  |

हवा ने उससे पूछा ” क्यों भाई क्या बात है लगता है काफी परेशान हो |  पेड़  बोला “हवा बहन क्या बताऊं |  काश मैं भी तुम्हारी तरह चल-फिर सकता  | यहां खड़े खड़े मैं तो तंग आ गया हूं  | अच्छा होता जो मैं दूर किसी घने जंगल में उनका होता |

हवा ने सुना तो हैरान रह गई मगर चुप रही | पेड़  बोला “आबादी के पास फलदार वृक्षों का खड़ा रहना ही बेकार है |  मुझे देखो मैंने अब तक अपनी काया में पके हुए फल नहीं देखे |  इंसानों के बच्चे फलों के पकने का भी इंतजार नहीं करते |  देखो ना गांव के बच्चे ने मुझ पर चढ़ चढ़ मेरे अंगों का क्या हाल किया और पत्तों को तोड़ डाला है |

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हवा मुस्कुराई और  बोली “दूर के ढोल सुहावने होते हैं |  जंगल में फलदार वृक्ष तो बहुत दुखी है |  मुझे तो उनकी हालत पर तरस आता है|”

” जंगल में फलदार दुखी है! तुम मजाक तो नहीं कर रही हो?” पेड़ ने  पूछा|

हवा बोली ” और नहीं तो क्या जंगल के फलदार पेड़ अपने ही शरीर के फलों का वजन नहीं संभाल पाते और अक्सर फलों का बोझ  सहते-सहते पेड़ का सारा बदन दुख जाता है |  जब फल गिर जाते हैं तभी जंगल के पेड़ों को राहत मिलती है |  यही नहीं  ढेर सारे पके हुए फल पेड़ों के आस पास सड़ते  रहते हैं  | और वो खड़े यह सब देखते हैं”

” अच्छा बहन मैं ऐसे ही ठीक हूं |  मेरे फल मीठे हैं तभी तो बच्चे उनके पत्नी का इंतजार नहीं करते  | अरे हां याद आया पतझड़ के मौसम में यह बच्चे तो मेरे पास भी नहीं आते  | उन दिनों में परेशान हो जाता हूं  |  रही बात मेरे टहनियों और पत्तों की तो वसंत आते ही मेरे कोमल अंग उग जाते हैं’ आम के पेड़ ने हवा से कहा  |  हवा मुस्कुराते हुए आगे बढ़ गई | पेड़ ने  मन ही मन हवा को धन्यवाद दिया और खुशी से झूमने लगा |

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