Funny Story in Hindi With Moral – चूहा और मैं

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Funny Story in Hindi With Moral

चाहता तो कहानी का शीर्षक ” मैं और चूहा ” रख सकता था , पर मेरा अहंकार इस चूहों ने निचे  कर दिया है | जो मैं नहीं कर सकता वह मेरे घर का चूहा कर लेता है | जो इस देश का सामान्य आदमी नहीं कर पाता वह इस चूहे ने मेरे साथ करके बता दिया |

इस घर में एक मोटा चूहा है | जब छोटे भाई की पत्नी थी तब घर में खाना बनता था | इस बीच पारिवारिक दुर्घटनाओं, बहनोई की मृत्यु आदि के कारण हम लोग बाहर रहे |

इस चूहे ने अपना यह अधिकार मान लिया था कि मुझे खाने को इस घर में मिलेगा | ऐसा अधिकार आदमी भी अभी तक नहीं बन पाया पर चूहे ने मान लिया है | घर लगभग 45 दिन बंद रहा | मैं जब अकेला लौटा और घर खोला तो देखा कि चूहे ने काफी क्रॉकरी फर्श पर गिरा कर तोर  डाली है |

वह खाने की तलाश में भर दौरता होगा | क्रॉकरी और डिब्बों में खाना तलाशता होगा | उसे नहीं मिलता होगा तो वह पड़ोस में कहीं कुछ खा लेता होगा और जिंदा रहता होगा | पर उसने घर नहीं छोड़ा | उसने इसी घर को अपना घर मान लिया था|

जब मैं घर में घुसा, बिजली जलाई तो मैंने देखा कि वह खुशी से चहकता हुआ यहाँ से वहां दौर रहा था |  वह शायद समझ गया कि अब इस घर में खाना बनेगा डिब्बे खुलेंगे और उसी की थोड़ा उसे मिलेगी| दिन भर वह आनंद के सारे घर में घूमता रहा मैं देख रहा था | उसके उल्लास से मुझे अच्छा ही लगा|

पर घर में खाना बनना शुरू नहीं हुआ | मैं अकेला था बहन के यहां, जो पास में ही रहती है, दोपहर को भोजन कर लेता| रात को देर से खाता हूं तो बहन डिब्बा भेज देती है | खाना खाकर मैं डिब्बा बंद करके रख देता | चूहा निराश  हो रहे थे | सोचते होंगे यह कैसा घर है आदमी आ गया है रोशनी भी है पर खाना नहीं बनता |

खाना बनता तो कुछ बिखरे दाने या रोटी के टुकड़े उसे मिल जाते मुझे मिलते | एक नया अनुभव हुआ | रात को चूहा बार-बार आता और जाता  | कई बार मेरी नींद टूटती |  मैं उसे भगाता  लेकिन थोड़ी देर बाद फिर आ जाता और मेरे सिर के पास हलचल करने लगता |

वह भूखा था मगर उसे सर  और पांव की समझ कैसे आई? वह मेरे पांव की तरफ गड़बड़ नहीं करता था, सीधे सिर की तरफ आता और हलचल करने लगता  | एक दिन वह मच्छरदानी में घुस गया मैं बड़ा परेशान था की  क्या करूं? इसे मारुँ ? और यह अगर किसी अलमारी के नीचे मर गया तो सरेगा  और सारा घर दुर्गंध से भर जाएगा  |  फिर भारी अलमारी हटाकर मुझे निकालना पड़ेगा |

Funny Story in Hindi With Moral

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Funny Story in Hindi With Moral

चूहा दिन भर भराभराता और रात को मुझे तंग करता  |  मुझे नींद आती मगर चूहा राम फिर मेरे सिर के पास बड़बड़ाने लगते  |  आखिर एक दिन मुझे समझ में आया कि चूहे को खाना चाहिए  |  क्योंकि उसने इस घर को अपना घर मान लिया है वह अपने अधिकार के प्रति सचेत है  |  वह रात को मेरे सिरहाने आकर शायद यह कहता होगा “क्यों रे तू आ गया है  | मजे से  खा रहा है मगर मैं भूखा मर रहा हूं  |  मैं इस घर का सदस्य हूं  |  मेरा भी हक है मैं तेरी नींद हराम कर दूंगा  | ”

तब मैंने उसकी मांग पूरी करने की तरकीब निकाली  |  रात को मैंने भोजन का डिब्बा खोला तो पापड़ के कुछ टुकड़े यहां वहां डाल दिए  |  चूहा कहीं से निकला और एक टुकड़ा उठाकर अलमारी के नीचे आने लगा  |  भोजन करने के बाद मैंने रोटी के कुछ टुकड़े फर्श पर बिखरा-बिखरा दिए  |  सुबह देखा कि वह सब खा गया है  |

अब यह रोजमर्रा का काम हो गया  |   मैं डिब्बा खोलता तो चूहा निकलकर देखने लगता  |  मैं एक दो टुकड़े डाल देता वह उठाकर ले जाता वह रात को उन्हें खा लेता और सो जाता  |  इधर मैं भी चैन की नींद सोता  |  चूहा अब मेरे सिर के पास गड़बड़ नहीं करता   था  |

मगर मैं सोचता हूं आदमी क्या चूहे से भी बदतर हो गया है  |  चूहे तो अपनी रोटी के हक के लिए मेरे सिर पर चढ़ जाता है, मेरी नींद हराम कर देता है |  इस देश का आदमी कब चूहे की तरह आचरण करेगा?

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