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Hindi Story – सोने का सिक्का देने बाला शंख

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बहुत पहले की बात है एक बार पहलवान पुर नाम के गांव में एक गरीब परिवार रहता था | इस परिवार में सिर्फ तीन लोग थे सुरेश , सुरेश की पत्नी बिमला और सुरेश का बेटा राजू  | सुरेश बड़ा ही भोला भाला आदमी था और आसानी से बेवकूफ बन जाता था लेकिन उसकी पत्नी बड़ी ही चतुर औरत थी |

एक बार पहलवान पुर गांव में महाज्ञानी बाबा के कुछ शिष्य आए जिन्होंने अपनी शक्ति से गांव वालों के कई सारी समस्याओं को हल कर दिया और उन्होंने बताया कि वह सभी महाज्ञानी बाबा के शिष्य हैं और महाज्ञानी बाबा हिमालय के पहाड़ों पर रहते हैं |

सुरेश और उसकी पत्नी विमला गरीबी से बहुत दुखी थी इसलिए विमला  ने सुरेश को हिमालय के पर्वत पर जाकर महाज्ञानी बाबा से अपनी गरीबी को दूर करने के लिए कुछ उपाय बताने को कहा |

अपनी पत्नी विमला की बात मानकर सुरेश हिमालय पर्वत की ओर चला गया कई दिनों तक काफी मुश्किल यात्रा करने के बाद सुरेश हिमालय पर्वत पर पहुंचा और महाज्ञानी बाबा के पास जाकर अपना हाल और दुख महाज्ञानी को बताया |

महाज्ञानी बाबा को उस पर दया आ गई इसलिए महाज्ञानी बाबा ने उन्हें एक शंख दिया और कहा कि रोज सुबह को पूजा करने के बाद इस शंख से तुम्हें एक सोने का सिक्का मिल जाएगा जिससे तुम्हारी गरीबी दूर हो जाएगी |

शंख को लेकर सुरेश बहुत खुशी हुआ खुश हुआ और महाज्ञानी बाबा को धन्यवाद कहकर सुरेश वहां से चला आया |

वापस पहलवान पुर लौटने का रास्ता काफी मुश्किल था और सुरेश काफी थक चुका था इसलिए आराम करने के लिए सुरेश को कोई जगह चहिये था |

तभी सुरेश को एक घर से कुछ रौशनी आती हुए दिखाई देता है इसी कारण सुरेश थोड़ा आराम करने के उद्देश्य से मदद मांगता है उस घर के लोग तैयार हो जाते हैं और सुरेश को रहने के लिए एक कमरा दे देते हैं और रात को सुरेश को खाने के लिए थोड़े फल भी देते हैं | रात को खाना खाते समय उस घर के लोग  सुरेश से पूछते हैं कि उस सुरेश यहां क्यों आया था तब सुरेश उसे बताता है कि वह यहां महाज्ञानी बाबा से मिलने आया था और महाज्ञानी बाबा ने किस प्रकार एक शंख देकर उनकी गरीबी को दूर किया है |

सुरेश से शंख की बात जानकर उन लोगों के मन में लालच उत्पन्न हो गया और उन्होंने रात के अंधेरे में जब सुरेश सो रहा था तो सुरेश का शंख चुरा लिया और उस शंख के बदले एक साधारण सा शंख सुरेश के पास रखती है सुबह उठकर सुरेश उन लोगों का शुक्रिया करके अपने घर जाने को तैयार हूं अपने घर की ओर निकल पड़ा जब वह अपने घर पहुंचा तो अपने पत्नी से बात बताइए कि किस प्रकार ज्ञानी बाबा ने उसे  शंख  दिया है जिससे उनकी गरीबी मिट जाएगी |

अगले दिन दूसरे दिन सुबह को सुरेश पूजा पाठ करके शंख को हिलाता है लेकिन उससे कोई सोने का सिक्का नहीं निकलता है |

सुरेश को कुछ समझ में नहीं आता कि यह शंख काम क्यों नहीं कर रहा है और वह काफी दुखी हो जाता है |

सुरेश की पत्नी बड़ी समझदार थी इसलिए उसने सुरेश से पूछा कि जब महाज्ञानी बाबा ने तुम्हें शंख दे दिया था उसके बाद से तुम कहां कहां गए थे |

तो सुरेश ने पूरी बात बताई पूरी बात को ध्यान से सुन कर विमला समझ गई थी रात को जब सुरेश उस घर में सोने गया था तभी किसी ने उसका शंख चुरा लिया  था |

 

यह सब जानकर विमला सुरेश को कहती है कि तुम दोबारा उस घर में जाओ और उन लोगों से कहना कि अगली बार जब मैं ज्ञानी बाबा के पास गया था तब उन्होंने मुझे एक शंख दिया था जो कि ठीक से काम नहीं करता था |  इसलिए मैं फिर से उनके पास गया इस पर उन्होंने मुझे एक ऐसा शंख दिया है जो एक बार में दो सोने का सिक्का देता है |

सुरेश ने ऐसा ही किया वह उस घर में दोबारा गया और वहां के लोगों को जाकर उसने बताया कि वह दोबारा फिर से वह महाज्ञानी बाबा के पास गया था और उनसे एक दूसरा शंख लेकर आया है जो कि एक बार में दो सोने के सिक्के देता है |

यह बात सुनते ही उन लोगों को उन लोगों की लालच फिर से जाग गई और उन लोगों ने रात को जब सुरेश सो रहा था तब पुराने वाले शंख से नए वाले शंख को बदल दिया इस तरह सुरेश को उसका शंख वापस मिल गया |

दोस्तों इस कहानी से हमे यह सीख मिलती है की बुद्धि का उपयोग करके हम हर समस्या का समाधान निकाल सकते है |

Santosh-Mahato

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